Hello दोस्तों Hindi Read में आप सभी का स्वागत है|आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति की Real Life Story बता रहे है| जिनका नाम है -“धीरूभाई अम्बानी” | जो दुनिया की Top Most company, Reliance के Founder, Indian Business Tycoon, indian businessman है| इन्होने ही रिलायंस कंपनी की पहली नीव रखी थी|और इन्ही के परिश्रम के कारण आज Reliance दुनिया की Top company में से एक है| जब धीरुभाई अम्बानी ने इस दुनिया से विदा लिया तब उनकी कुल सम्पत्ति 62 हजार करोड़ से भी अधिक थी| आज हम आपको Dhirubhai Ambani के जीवन परिचय के बारे में बताएँगे|

dhirubhai ambani biography

जीवन परिचय :-

पूरा नामधीरजलाल हीराचंद अम्बानी
जन्म28 दिसम्बर 1932
स्थानजूनागढ़, गुजरात में
पिता का नामगोवर्धन अम्बानी
माता का नामजमनाबेन
सम्मानपदम्  विभूषण (Padma Vibhushan)
मृत्यु6 जुलाई 2002 (आयु 69)

धीरुभाई अम्बानी का बचपन (Dhirubhai Ambani childhood story)

धीरुभाई अम्बानी (धीरजलाल हीराचंद अम्बानी) का जन्म गुजरात के जूनागढ़ जिले के एक छोटे से गाव चोरवाड़ में 28 दिसम्बर 1932 को हुआ| इनके पिता का नाम गोवर्धन अम्बानी था| और इनकी माता का नाम जमनाबेन था| इनके पिता पेसे से एक अध्यापक थे| लेकिन उस समय अध्यापक की सैलरी बहुत कम थी| जिस कारण घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी| धीरुभाई अम्बानी अपने पाच भाई बहिनों में तीसरे नंबर के थे|

dhirubhai ambani education

पिता की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण धीरुभाई अम्बानी ने अपनी पढाई को हाई स्कूल में ही छोड़ दिया| जिस कारण वह अपनी शिक्षा को पूर्ण नहीं कर सके|आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख कर बचपन में ही धीरुभाई अम्बानी ने कुछ छोटा काम करने का फैसला ले लिया था| जिससे वह अपने पिता के साथ घर की आर्थिक स्थिति को सुधार सके|

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धीरुभाई अम्बानी का व्यवसायिक जीवन

धीरुभाई अम्बानी का व्यवसायिक जीवन बहुत संघर्षो से भरा पड़ा है| एक गरीब अध्यापक का बेटा जिसने अपनी पढाई भी पूरी न की हो उस व्यक्ति के लिए व्यवसायिक जीवन कितना संघर्ष पूर्ण रहा होगा | लेकिन उसके बावजूद भी धीरुभाई ने व्यापार जगत में अपना वो नाम कमाया की पूरा विश्व आज उन्हें जनता ही नहीं उनके दिए मार्ग को अपनाता भी है|

परिवार की स्थिति को सुधरने के लिए धीरुभाई ने बचपन में ही काम करना शुरु कर दिया था| पहले उन्होंने अपने गाव के पास गिरनार पर्वत (एक धार्मिक स्थल)में पकोड़े बचने का काम किया| इस काम से वह कुछ पैसे कमा लेते थे लेकिन यह काम पूर्ण रूप से पर्यटकों पर निर्भर था तो ऐसे में कभी काम सही चलता था कभी नहीं | ऐसे में धीरुभाई ने इस काम को कुछ ही समय बाद बंद कर दिया|

अब यमन के एडेन सहर में अपने बड़े भाई की सहायता से जॉब करने पहुच गये | यह धीरुभाई अम्बानी की पहली जॉब थी|  एडेन सहर में उन्होंने 300 प्रति माह में “ए. बेस्सी & कंपनी” में काम किया| कुछ साल बाद ये कंपनी सेल कंपनी के उत्पादों की वितरक बन गयी| और जल्द ही धीरुभाई को प्रबंधक का पद प्राप्त हो गया|

सन 1958 में धीरुभाई किसी कारणवस यमन से भारत लौट आये| और अब वह भारत में खुद का बिज़नस करना चाहते थे| लेकिन इस के लिए उनके पास प्रयाप्त पैसे नहीं थे| इसी कारण उन्होंने अपने चचेरे भाई चम्पकलाल दमानी के साथ बिज़नस शुरु करने का फैसला लिया| इसके लिए उन्होंने मसालों का बिज़नस चुना और अपना खुद का एक छोटा मोटा मसालों का बिज़नस शुरु कर दिया| यही वह समय था जब रिलायंस कमर्शियल कारपोरेशन (Reliance Commercial Corporation) की सुरुवात हुई| देखते ही देखते यह बिज़नस अच्छा चल गया|

अब रिलायंस कारपोरेशन ने सूत के व्यवसाय में भाग लिया| लेकिन इस में जोखिम बहुत था जिस कारण चम्पकलाल दमानी ने इस काम में हिस्सेदारी से मना कर दिया| लेकिन धीरुभाई अम्बानी जोखिम लेने से पीछे नहीं हटे क्योकि उन्हें सूत कारोबारी का भविष्य सुनहरा दिखाई देता था| इसी कारण सन 1965 में धीरुभाई अम्बानी और चम्पकलाल दमानी के बीच हिस्सेदारी समाप्त हो गयी और दोनों ने अलग अलग बिज़नस करने का फैसला लिया|

जल्द ही धीरूभाई अम्बानी का सूत का कारोबार सिखर पर पहुच गया यहाँ से उन्हें बहुत ज्यादा लाभ प्राप्त होने लगा| सन 1966 में सूत का कारोबार रिलायंस टेक्सटाइल के रूप में उभर कर आया| और उन्होंने एक टेक्सटाइल मिल (जो अहमदाबाद के नरोदा में स्थित है) की स्थापना कर दी|साथ ही इन्होने अपने ब्रांड का नाम “विमल” रख दिया| यह नाम इनके बड़े भाई के बेटे का था उसी के नाम पे ये ब्रांड नाम बना दिया| जल्द ही धीरुभाई ने इसका विज्ञापन जोरो सोरो से कर दिया| जिसका परिणाम जल्द ही सामने आया और “विमल” ब्रांड भारत का एक प्रमुख ब्रांड बन गया| अब समय था जब रिलायंस को अन्य कारोबार में भी अपने कदम रखने थे| और तब से लेकर आज तक रिलायंस ने बहुत से कारोबारों में भाग लिया और रिलायंस को दुनिया की टॉप कंपनियो में जगह दिलवाई|

धीरुभाई अम्बानी का व्यवाहिक जीवन

धीरुभाई अम्बानी का विवाह सन 1955 में कोकिलाबेन से हुआ|धीरुभाई को कोकिलाबेन से दो बेटे व दो बेटिया प्राप्त हुए | बेटे- मुकेश अम्बानी व अनिल अम्बानी तथा बेटिया- दीप्ती व नीना है| धीरुभाई अम्बानी और कोकिलाबेन का रिश्ता बहुत ही सच्चा व गहरा था धीरुभाई अम्बानी कोकिलाबेन को घर के कामो के साथ साथ ऑफिस के कामो की जिमेदारी भी दिया करते थे ताकि वह भी बिज़नस की बारीकियो को समझ कर उन्ही सहायता कर सके|

स्वास्थ्य  ख़राब के कारण निधन (dhirubhai ambani death)

धीरुभाई अम्बानी का निधन (dhirubhai ambani death)दिल का दौरा पड़ने के कारण 6 जुलाई सन 2002 को हुआ| उन्हें इससे पहले भी सन 1986 में दिल का दौरा पड़ा था| जिससे वह 1 हफ्ते तक कोमा में रहे थे| लेकिन इस बार वह इस दौरे को नहीं सह पाए और वह इस दुनिया से चले गए|

धीरुभाई अम्बानी को वैसे तो बहुत से सम्मानो से सम्मानित किया है लेकिन सन 2016 में उनके कृत कार्यो के कारण भारत के दुसरे सबसे बड़े सम्मान पदम् विभूषण (padma vibhushan)से सम्मानित किया गया|

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