हेलो दोस्तों HindiRead में आप सभी का स्वागत है| आज हम आपको hindi Story या हिंदी शिक्षाप्रद कहानी द्वारा आजादी के महत्व को समझाना चाहते है| क्योकि आजादी का महत्व समझना बहुत जरुरी है|

आजादी का महत्त्व

एक तालाब के बहुत से मेढक रहते थे वे हमेसा ही बड़े असंतोष रहते थे | वे कभी प्रसन्न नहीं रहते थे| वे हमेसा ही एक दूसरे की बातो पर सिकायत करते रहते थे| उन मेढ़को को कोई रोक टोक नहीं थी| अपनी यह आजादी भी उनको खलने लगी एक बार वहां भगवान प्रकट हुए तो मेढ़को ने टरटराते हुए भगवान से बोले – “हे प्रभु आप किसी को हमारा राजा बना दीजिये जो हम पर शासन कर इस तालाब को संभाल सके|”

भगवान मेढ़को की बात को सुनकर आश्चर्य में पढ़ गए और मन ही मन सोचने लगे की – कैसे मुर्ख मेढक है जिन्हें अपनी आजादी पसंद ही नहीं आ रही है और राजा की नियुक्ति की मांग कर रहे है जो इन सभी पर शासन कर सके|

Related Post :-

भगवान को एक मजाक सुझा | और ये सब सोच भगवान ने पास के ही पेड़ की एक लकड़ी को दिखाते हुए कहा – ये लो ये रहा तुम्हारा राजा |

मेढक राजा को पाकर बहुत ही खुश हो गए और अब वो लकड़ी को राजा समझ कर उसकी पूजा करते और उससे दूर दूर रहते| बहुत दिन बीत गए, पर राजा अपनी जगह से न हिला न डुला |ये सब देख मेढक सोच में पढ़ गए और सोचने लगे – यह कैसा राजा है जो न हिलता है न डुलता है | और न ही कुछ खाता है न ही कुछ पीता है| कुछ मेढक बहुत हिम्मत कर उस लकड़ी के पास गए और उसे ध्यान से देखने लगे | ऐसा करने के बाद भी राजा न हिला न डुला |

अब मेढ़को का डर कम हो गया | वे राजा के और पास जाने लगे और उसके समीप ही पहुच गए| जब उन्होंने देखा की – “यह तो ये लकड़ी है|”

ये सब देख वो सब  मेढक मिल कर भगवान के पास गए और बोले – “हे प्रभु ! आपने हमे ये कैसा राजा दे दिया यह तो न हिलता है न ही डुलता है न कुछ भोजन करता है और न ही अपराधी को सजा देता है| और न ही किसी बहादुर को कोई इनाम देता है|

आप कृपया कर हमे ऐसा राजा दीजिये जो तेज और चालक हो | जो अपराधियों को दंड दे सके | साथ ही जिसमे एक अच्छे राजा के सारे गुण हो |

ये सब सुन भगवान ने कहा अब इन्हें सबक सिखाना ही होगा इन्हें अपने आजादी पसंद नहीं आई | ये सब सोच भगवान ने सारस को मेढ़को का राजा बना दिया| जैसे ही सारस मेढ़को के तालाब में पंहुचा तालाब में हाहाकार मच गया सभी मेढक यहाँ वह भागने लगे| क्योकि सारस ने मेढको को खाना शुरू कर दिया था|

मेढ़क इससे बहुत ही ज्यादा चिंतित हो गए | वे सभी पुनः इकट्ठा हो कर भगवान के पास गए और टर-टर्राते हुए विनती करने लगे – “हे प्रभु कृपया कर इस राजा से हमे मुक्ति दिलाइये अन्यथा यह हम सभी को अपना भोजन समझ कर खा जायेगा | आपका यह राजा तो बहुत ही ज्यादा अत्याचारी है| कृपया कर हम सभी को इस राजा से मुक्ति दिलाइये”

यह सब सुन भगवान बोले – “जब तुम आजाद थे तो तुम्हे आजादी का महत्व समझ नहीं आया जिसके चलते तुम सभी आपस में लड़ते और बोलाबाली करते रहते थे | और उस समय तुम्हे एक ऐसा राजा चाहिए था जो तुमहे गलती करने पर कठोर दंड दे सके| ”

यह सब सुन मेढ़को ने भगवान से इस गलती के लिए दिल से क्षमा मांगी | और  कहा की आज हम आजादी के महत्त्व को अच्छे तरह से समझ गए है | कृपया कर हमे इस राजा से मुक्त कर दे|

भगवान समझ गए की अब इन मेढको को आजादी का असली महत्व समझ आगया है| ये सब सोच भगवान ने सारस को वापस बुला लिया |

सीख
इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की आजादी के महत्व को समझना बहुत ही जरुरी है | न की उस आजादी का दुरुप्रयोग करना चाहिए | आजादी का दुरुप्रयोग करने से स्वयं की ही हानि होती है|

यह कहानी मेरी बचपन की किसी बुक की कहानी में से एक है जो मुझे याद थी यदि यह कहानी आपको पसंद आयी हो तो आप हमे कमेंट कर जरूर बताये| साथ ही किस त्रुटि के लिए आप हमे ईमेल कर बता सकते है| और यदि ऐसी ही कोई शिक्षाप्रद कहानी आपके पास हो तो आप हमे ईमेल द्वारा उस कहानी को साझा कर सकते है |

ईमेल @ :- contact.hindiread@gmail.com