कभी हार ना माने – Hindi Motivational Kahani

दौलत ऐसो आराम तोह देखते है पर कभी ये कोई नहीं देखता की आपके उसे पाने के लिए कितना सब्र किया | कभी कोई ये नहीं देखता आपने कितनी कठिनाईयों का सामान उस इज्जत को पाने के लिए किया| बस लोग देखते है तोह बहरी चकाचौध| आज हम आपके लिए लेकर आये है ऐसी ही एक hindi कहानी जिसका शीर्ष है “कभी हार ना मने” ( Never Give Up)

कभी हार ना मने” ( Never Give Up) – Hindi Kahani

एक बार बात है एक बड़े से घर मे खुशहाल परिवार रहा करता था जिसमे उनका इकलौता बेटा था। उसे माँ बाप ने बड़े लाड से पाला था, एक दिन की बात है उनके घर मे एक बड़ा सा शीशे का टैंक ( Accurium ) था जिसमे बहुत सारी छोटी बड़ी मछलियाँ थी लेकिन बच्चा कुछ दिनों से देख रहा था की एक बड़ी मछली रोजाना छोटी मछलियों को खा जाती थी| ऐसे ही करके उस मछली के टैंक मे अब कुछ ही मछलियाँ बची थी |

तोह ये देख बच्चे ने एक अकल लगायी और जल्दी से अक पारदर्शी कांच की प्लेट ले आया | अब उस बड़ी मछली और छोटी मछलियों के बीच उस काँच की दीवार को रख दिया ताकि वे एक दूसरे से दूर रहें। अब जैसे बड़ी मछली ने छोटी मछलियों को देखा तो वह तेजी से उनकी ओर बड़ी लेकिन, जैसे ही बड़ी मछली आगे की ओर गयी, वो कांच की दीवार से टकरा गयी और उन छोटी मछलियों तक नहीं पहुँच पायी। उस बड़ी मछली को कुछ समझ नहीं आ रहा था वो वह फिर से छोटी मछलियों की ओर दौड़ी लेकिन इस बार भी वो उनके पास पहुचने मे विफल रही। यह देख बच्चे को खूब मजा आ रहा था|

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लेकिन बार बार प्रयास करने के बाद भी जब बड़ी मछली उन छोटी मछलियों तक नहीं पहुच सकी तोह उसे बहुत गुस्सा, और इस बार वो अपनी पूरी ताकत से छोटी मछलियों को खाने के लिए झपटी लेकिन फिर से कांच की दीवार ने उसे रोक लिया । कुछ समय तक यही सब चलता रहा मछली आगे जाती लेकिन दिवार उसका रास्ता रोक लेती| अब बार बार मछलियों पर हमला कर जब बड़ी मछली विफल हो जा रही थी तो अब बड़ी मछली को लगा की वह अब इन छोटी मछलियों को नहीं खा सकती, और बस यही सोचकर उसने हमला करना बंद कर दिया|

बड़ी मछली पूरी तरह से थक चुकी थी और शांति से पानी में तैरने लगी। ये देख बच्चे ने उस कांच की दिवार को टैंक से बहार निकल लिया, लेकिन बच्चे को यह डर लगने लगा की पुनः ये मछलियों को खा न जाए । लेकिन ये क्या, बच्चे ने देखा की बड़ी मछली ने अब हमला नहीं किया| उसे देख ऐसा लग रहा था जैसे उसने मान लिया हो कि अब तो वो छोटी मछलियों को कभी नहीं खा पायेगी। बच्चा ये सब कुछ काफी देर तक देखता रहा अंत में जब उसे यह यकीं हो गया की अब खुले टैंक में भी बड़ी मछली छोटी मछलियों पर हमला नहीं कर रही थी।

बच्चा बहुत प्रसन्न हुआ, और दौड़ के अपने माता पिता को बुला लाया और उन्हें पूरी घटना बताई| और फिर बच्चे ने अपने पिता से पूछा – पिताजी, अब इसने मछलियों पर हमला करना क्यों बंद कर दिया ?

यह सुनकर बच्चे के पिता हँसते हुए बोले – बेटा,  उसने हमला नहीं किया क्यूंकि वो हार मान चुकी है उसे लगता है की अब वह कभी भी उन पर हमला नहीं कर पाएगी| वह सोच रही है की अगर वह पुनः उन छोटी मछलियों पर हमला करेगी तो वह दिवार उसे रोक लेगी पर ऐसा नहीं है|

हम लोग भी ठीक इसी तरह से कुछ प्रयास में विफल होने के बाद के बाद ये सोचने लगते है की अब ये हमसे नहीं हो सकता, हम भी किसी कांच जैसी दीवार को अपनी कमी मान बैठे हैं कि अब हम कुछ नहीं कर सकते।

तो दोस्तों कहीं आपने भी तो अपनी परेशानियों से हार नहीं मान ली? सोच लीजिये जिन्दगी भर कोई अवरोध नहीं रहता, क्या पता आपके और आपके लक्ष्य के बीच की काँच की दीवार भी हट चुकी हो लेकिन आप अभी भी अपनी पुराणी सोच की वजह से प्रयास ही नहीं कर रहे। तो सोचिये मत, प्रयास करते रहिये आप जरूर कामयाब होंगे | यही था हमरी कहानी का उद्देश्य की कभी हार मत मानो.