आज के समय में हम लोगो की बातो में आ कर अपनी क्षमता को भुल जाते है और वो जैसा कहते है वैसा करने लगते है। लेकिन अपनी क्षमता (योग्यता) को नही पहचान पाते है। आज मैं आपके सामने इस पर एक हिन्दी कहानी खोज कर लाया हूॅ। 

dushro ke kahne me apni yogyta bhulna

एक जगंल में एक पेड़ पर हंसनी रहती थी। उसने उस पेड़ पर घोसला बना रखा था। उस घोसले में उसने दो अण्डे दे रखे थे, ठीक उसी पेड़ के नीचे एक मुर्गी ने भी घोसला बना रखा था और उसने भी दो अण्डे दे रखे थे।  
एक दिन हंसनी खाने की खोज में बाहर चली जाती है तथा मुर्गी भी खोने की खोज में चली जाती है। तेज हवा चलने से हंसनी का एक अण्डा नीचे मुर्गी के घोसले में गिर जाता है और मुर्गी का एक अंडा साॅप उठा कर ले जाता है।
 
जब हंसनी आती है तो उसे एक ही अण्डा दिखता है फिर वह सोचती है, शायद एक अण्ड कोई शिकारी लेकर चला गया। दोनो अपने-अपने अण्डो की देखरेख करती रही। 
एक दिन दोनो के अण्डो से बच्चे निकलते है हंसनी के अण्डे से हंसनी का बच्चो निकलता है जिसे हंसनी उंडना और शिकार करना सिखाती है। 
मुर्गी के अण्डे से एक मुर्गी का बच्चा और एक हंसनी का बच्चा निकलता है। वह भी दोनो को दाना चुगना और चलना, फुदकना सिखाती है वैसे तो हंस का बच्चो बढ़ा था और उसके पंख भी बड़े थे किन्तु पैदा होते से ही वह मुर्गी की शरण में होने वह जैसा सिखाती वह वैसा सिखता। 
एक दिन वह हंसनी के बच्चे को उड़ात हुआ देखता और मुर्गी से पूछता है कि माॅ हम भी उनकी तरह उड़ नही सकते है। उस पर मुर्गी कहती है हम छोटे प्राणी है, हम कभी इतनी ऊची उड़ान नही भर सकते है। हम जमीन पर ही चल सकते है। हमारी इतनी क्षमता नही होती है कि इतने ऊचे उड़ सके।
वह बच्चा पूरी जिन्दगी जमीन पर ही रहता है और मुर्गी व मुर्गी का बच्चा जैसे-जैसा करते वैसा-वैसा करता रहता है किन्तु कभी भी अपनी योग्यता को नही पहचाता है और ना ही उड़ने की कोशीश करता है। 
इसलिए दोस्तो कहते है हमे अपनी योग्यता पर विश्वास होना चाहिए। लोगो के कहने में आ कर अपनी क्षमता को नही भुलना चाहिए। जिस प्रकार उस हंस ने अपनी योग्यता भुल कर मुर्गी के कहने पर सारी जिंदगी बिता दी। 

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