सृष्टि life cycal of nature best poem in hindi

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आदि और अंत कहाँ आता है

सृष्टि तेरा पार कहीं न पाता है

कितना सुंदर मयूर पक्षी देखो

लेकिन वह साँप को खाता है

किसे कहें शूर कौन शक्तिमान

शेर जैसा जीव पकड़ा जाता है

आदमी पल में बदल जाते हैं

कुत्ता ही अब वफा निभाता है

ये माना कि खाली हाथ जाना

फिर भी दो-दो हाथ कमाता है

मौसम खुशनुमा हवा अनुकूल

देखें आज कौन पतंग उड़ाता है

और कितना समझाएं ‘परिंदा’

सुबह से रोज ही समझाता है ।

राम शर्मा परिंदा

मनावर जिला धार मप्र

14/01/2021

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