Hindi diwash ke liye bahut hi sunder kavita 

*भाषा – परिभाषा*

“वेलकम” लिखे उस घर की

दहलीज पर 

जैसे ही मैंने कदम रखा

तो दरवाजे की ओट से 

धीरे से आवाज आई –

“पधारिये , महाशय आपका 

हार्दिक स्वागत है !”

मैंने गौर से देखा तो

एक डरे- सहमें बच्चे की भाँति

हिंदी खड़ी थी

और धीरे से उसने 

आँखों के इशारों में ही 

मुझे बैठक कक्ष में 

बैठने का निवेदन किया 

शायद अब उसमें 

बोलने का भी साहस नहीं रहा

क्योंकि

घर का मालिक 

मुझे देखते ही 

“वेलकम-वेलकम” कहते हुए

मेरी ओर आ रहा था

मैंने मन ही मन सोचा

यह “वेलकम” शब्द 

है तो सुखद 

किंतु कहीं न कहीं 

यह अनजाने में ही गम दे रहा है 

हमारी मातृभाषा को ।

और बदल रहा है 

मातृभाषा की परिभाषा को ।‌।

*हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई*

🌇राम शर्मा परिंदा 

मनावर जिला धार मप्र

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