Gandhi Jayanti Poems:

 “साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल” – Gandhi Jayanti Poems:

“साबरमती के संत तूने” गीत एक गाने की शैली में हमें महात्मा गांधी और उनके संघर्ष के दिनों का स्मरण कराता है। कवि प्रदीप के शब्द इस गाने के माध्यम से हमें गांधी जी के महानता और उनके आदर्शों का समर्थन करते हैं, और हमें याद दिलाते हैं कि सत्याग्रह के माध्यम से किसी भी अत्याचार का समापन किया जा सकता है। इस गीत का सुनना हमें गर्वित और प्रेरित करता है कि हमें सदैव अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए, जैसे कि महात्मा गांधी ने किया।

दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल

साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

{दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल

साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल}

आंधी में भी जलती रही गांधी तेरी मशाल

साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

दे दी हमें आजादी…

धरती पे लड़ी तूने अजब ढंग की लड़ाई

दागी न कहीं तोंफ न बंदूक चलाई

दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई

वाह रे फकीर खूब करामात दिखाई..

चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल

{साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल}

दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल

साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

शतरंज बिछा कर यहा बैठा था ज़माना

लगता था की मुश्किल है फिरंगी को हराना

टक्कर थी बड़े ज़ोर की दुश्मन भी था ताना

पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराना

मारा वो कस के दांव कि उल्टी सभी की चाल

{साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल}

दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल

साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े

मजदूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े

हिन्दू और मुसलमान सिख पठान चल पड़े

कदमों पे तेरे कोटि कोटि प्राण चल पड़े

फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल

{साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल}

दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल

साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

मन में थी अहिंसा की लगन तन पे लंगोटी

लाखों में घूमता था लिये सत्य की सोंटी

वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी

लेकिन तुझे झुकती थी हिमालय की भी चोटी

दुनियां में तू बेजोड़ था इन्सान बेमिसाल

{साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल}

दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल

साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

जग में कोई जिया है तो बापू तू ही जिया

तू ने वतन की राह में सबकुछ लुटा दिया

मांगा न कोई तख्त न तो ताज भी लिया

अमृत दिया सभी को मगर खुद जेहेर पिया

जिस दिन तेरी चिता जली रोया था महाकाल

{साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल}

दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल

साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

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