लेह जैसी मुश्किल टेरेन और हाई-ऑल्टिट्यूड कंडीशन्स में आमतौर पर निर्माण कार्य लंबा और चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन प्रेस स्टेटमेंट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के तहत खास कंक्रीट मिक्स और प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया जो कम तापमान और ऑक्सीजन में भी काम करने के लिए बनाया गया है। पूरे स्ट्रक्चर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह मौसम की मार, बर्फबारी और भूकंप जैसी स्थितियों में भी मजबूती से टिका रह सके।
बंकर में सैनिकों की बेसिक जरूरतों का ख्याल रखा गया है, जैसे कि बैरिकेडिंग, अंदर बैठने और हथियारों को रखने की व्यवस्था और जरूरी थर्मल इंसुलेशन। इसकी बनावट पूरी तरह कस्टमाइजेबल है, यानी जरूरत के हिसाब से साइज और स्ट्रक्चर को बदला भी जा सकता है।
इस प्रोजेक्ट को लेकर भारतीय सेना और रिसर्चर्स का कहना है कि यह देश की डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर में एक गेमचेंजर हो सकता है। न सिर्फ इससे निर्माण का समय घटेगा, बल्कि दुर्गम इलाकों में भी तेजी से पोस्ट और बेस तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही, लागत भी काफी हद तक कम होगी।
यह पहली बार है जब भारत ने इतनी ऊंचाई पर ऑन-साइट 3D प्रिंटिंग तकनीक का सफल उपयोग किया है। सेना के मुताबिक, भविष्य में इसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बॉर्डर एरिया में और भी स्ट्रक्चर्स बनाने के लिए किया जा सकता है।