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‘People in the industry often praise each other behind closed doors’ | ‘इंडस्ट्री में अक्सर लोग बंद कमरों में तारीफ करते हैं’: मोहित सूरी ने खुद को बताया संदीप रेड्डी वांगा का फैन; बोले-आजकल गाने रील्स के हिसाब से बनते

‘People in the industry often praise each other behind closed doors’ | ‘इंडस्ट्री में अक्सर लोग बंद कमरों में तारीफ करते हैं’: मोहित सूरी ने खुद को बताया संदीप रेड्डी वांगा का फैन; बोले-आजकल गाने रील्स के हिसाब से बनते


31 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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डायरेक्टर मोहित सूरी अपनी फिल्म ‘सैयारा’ के जरिए दो नए चेहरों के बड़े पर्दे पर लॉन्च कर चुके हैं। उन्होंने इस फिल्म में एक्टर्स के अलावा सिंगर और म्यूजिक कंपोजर को भी मौका दिया है। हालांकि, ये पहली बार नहीं है। मोहित अपने करियर की शुरुआती फिल्म से ही ऐसा करते आए हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में मोहित ने न्यूकमर्स के साथ काम करने, अपनी फिल्मों के म्यूजिक पर बात की है।

‘सैयारा’ को आम लोगों के अलावा इंडस्ट्री से भी खूब प्यार मिल रहा है। संदीप रेड्डी वांगा ने ट्रेलर को लेकर बहुत कुछ लिखा भी। इसे कैसे देखते हैं?

मैं इस बात को दिल से सराहता हूं। मेरे ख्याल में केवल एक बहुत ही सुलझा और सिक्योर इंसान ही दूसरों की काम की तारीफ कर सकता है। मैंने ‘एनिमल’ देखने के बाद उन्हें पर्सनली मैसेज किया था। मैंने पब्लिकली तारीफ नहीं की थी, मुझे ऐसा करना चाहिए था।

‘एनिमल’ देखने के बाद मुझे एहसास हुआ कि मैं संदीप रेड्डी वांगा फैन बन चुका हूं। उन्होंने भी मुझे सैयारा के टीजर के समय मैसेज किया था। मैं इसके लिए उनका शुक्रगुजार था। ट्रेलर के समय पर भी उन्होंने ट्वीट करके तारीफ किया। मैं कहूंगा कि ऐसे कम लोग होते हैं। लोग अक्सर बंद कमरों में एक-दूसरे की तारीफ करते हैं। पब्लिक फोरम में एक-दूसरे के साथ मुकाबला कर रहे होते हैं। इसके लिए मैं संदीप की प्रशंसा करता हूं।

आपकी फिल्मों की खासियत म्यूजिक होती है। आप नए आर्टिस्ट को मौका भी देते हैं। इस फिल्म में भी नए आर्टिस्ट को मौका मिला है।

इस फिल्म में ‘बर्बाद’ गाने को एक नए आर्टिस्ट ऋषभ कांत ने कंपोज किया है। वो एक नए ग्लिच पॉप आर्टिस्ट हैं। मुझे लगता है कि म्यूजिक को रेलिवेंट करने के लिए नए आर्टिस्ट को मौका देना बहुत जरूरी है। जैसे स्टाइल चेंज हो रहा है, वैसे ही म्यूजिक भी। हम अक्सर सक्सेस के साथ डिस्कनेक्ट हो जाते हैं। जब मेरे पास म्यूजिक कंपोजर और सिंगर मिथुन हैं, जिन्हें मैं राहुल द्रविड कहता हूं। वो मेरी दीवार और मजबूत फाउंडेशन हैं। वो हमेशा मेरे साथ एक लेवल का आधार लेकर आते हैं, जो कोई तोड़ नहीं सकता है। ऐसे में मैं फिर नए लोगों के साथ एक्सपेरिमेंट करता हूं।

इस फिल्म सचिन-परंपरा और विशाल मिश्रा जैसे लोग भी जुड़े हैं, जिनके साथ मैंने पहले काम नहीं किया है। लेकिन ये सारे स्टैब्लिश लोग हैं। मैं खुद के काम में दोहराव नहीं करना चाहता था। फिल्ममेकर की प्रवृत्ति होती है, एक ही टीम के साथ काम करना। लेकिन सेम मैजिक को क्रिएट करना में उसका पावर चला जाता है। मुझे लगता है कि जब आप अपना बेस बना लेते हैं, तब बहुत जरूरी होता है कि एक नए आर्टिस्ट को प्रोजेक्ट में लेकर आओ। उनकी आवाज, उनकी कहानी सुनो। उन्हें एक्सप्रेस करने का मौका दो। मैंने अपनी करियर में यही करने की कोशिश की है।

आप एक तरह से ट्रेंड सेटर हैं। आपने अपनी पहली फिल्म ‘जहर’ में ही मल्टी म्यूजिक डायरेक्टर्स को मौका दिया था।

वो कोई ट्रेंड नहीं था, असल में सर्वाइवल की कोशिश थी। जब मैंने करियर शुरु किया था , तब मैं सिर्फ 22 साल का था। मेरे साथ कोई स्टैब्लिश म्यूजिक डायरेक्टर काम नहीं करना चाहता था। उन्हें लगता था कि ये बहुत छोटा है, ये क्या डायरेक्शन देगा। मजबूरी में मैंने बहुत सारे यंग लड़कों और बैंड के साथ काम करना शुरू किया। धीरे-धीरे मेरी अयोग्यता ही मेरा स्टाइल बन गया। विकल्प का न होना मेरी सबसे बड़ी ताकत बन गई।

'जहर' का म्यूजिक साल 2005 में चौथा सबसे अधिक बिकने वाला एल्बम था।

‘जहर’ का म्यूजिक साल 2005 में चौथा सबसे अधिक बिकने वाला एल्बम था।

‘आशिकी 2’ में ‘सुन रहा है’ तू गाना नहीं था लेकिन आप उसे फिल्म में लेकर आए। क्या सैयारा के साथ ऐसा कोई किस्सा है?

इस फिल्म के दो गाने बन चुके थे लेकिन तब तक फिल्म का टाइटल मेरे पास नहीं था। मैं हमेशा से जानता था कि जो लास्ट गाना इस फिल्म में आएगा, वही इसका टाइटल भी होगा। मैं छह महीने से गाना ढूंढ रहा था और मुझे मिल नहीं रहा था। मैंने पहले सिंगर फहीम अब्दुल्ला का एक गाना इश्क सुना था। मैं दुबई में था और मैंने तनिष्क बागची को क़ॉल किया और कहा कि मुझे इन लड़कों के साथ काम करना है। तनिष्क ने बताया कि ये लड़के मुझसे मिलने आए थे। हम इस फिल्म को शूट कर रहे थे, उस वक्त फिल्म का टाइटल प्रोडक्शन नंबर-76 था।

मेरे दुबई से वापस आने के बाद, सुमना घोष ने मुझे सैयारा टाइटल सजेस्ट किया था। उस वक्त मेरी ना था कि क्योंकि सैयारा उनका एक हिट गाना है। फिर बाद मैं मैंने अपने गीतकार इरशाद कामिल साहब से इसका जिक्र किया, तो उन्होंने कहा ये अच्छा है। उन्होंने मुझे सैयारा का मतलब समझाया और ये बताया कि कैसे ये टाइटल मेरी फिल्म से कनेक्ट हो सकता है। मैंने फिर इरशाद जी से जाकर कहा कि क्या हम सैंया शब्द को सैयारा कर सकते हैं। आखिरी मिनट पर सैयारा टाइटल ट्रैक आया और बनते-बनते मैजिक क्रिएट हो गया।

साल 2013 में 15 करोड़ रुपए की लागत से बनी 'आशिकी-2' ने 109 करोड़ रुपए का बिजनेस किया था।

साल 2013 में 15 करोड़ रुपए की लागत से बनी ‘आशिकी-2’ ने 109 करोड़ रुपए का बिजनेस किया था।

आपने लीक से हटकर फिल्में बनाई हैं। आपको नहीं लगता कि आप जो तारीफ डिजर्व करते हैं, वो सही से मिला नहीं?

मुझे अपनी फिल्म को सेलिब्रेट करने में मजा आता है, खुद को नहीं। मेरा मानना है कि जीनियस एक आइडिया होता है, इंसान नहीं। अगर कोई फिल्म अच्छा कर रही है, तो हमें उसे सेलिब्रेट करना चाहिए। मैं एक डायरेक्टर फैमिली से आता हूं। हम सब अच्छा काम करेंगे लेकिन हम बुरा काम भी करेंगे। हम सफलता भी देखेंगे और हम फेल भी होंगे।

‘आवारापन’, ‘हमारी अधूरी कहानी’ जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलीं लेकिन इनके गाने आज भी लोगों के जेहन में हैं। अब इन फिल्मों के कल्ट माना जाता है।

‘सैयारा’ फिल्म में एक डायलॉग है कि हिट गाने आएंगे और चार महीने बजेंगे। लोग उन पर नाचेंगे और फिर वो चल जाएंगे। जो गाने याद रह जाते हैं, वो दिमाग में नहीं दिल में रह जाते हैं। जेहन में याद रहने जाने वाले गाने आजकल बनते नहीं हैं। मैं इसके लिए किसी और को जज नहीं करूंगा। आप गाने में जितना इमोशन और एफर्ट डालेंगे, गाना उतना ही यूनिवर्सल होगा। आजकल लोग एल्गोरिदम और रील्स को फॉलो कर रहे हैं और गाने में एहसास नहीं डाल रहे हैं।

‘सैयारा’ टाइटल ट्रैक साढ़े छह मिनट का है। मुझे बहुत सारे लोगों ने कहा कि इस साढ़े तीन मिनट का बनाओ। मुझे लगता है कि गाने में इमोशन होंगे तो लोग खुद उतने का इस्तेमाल करके अपना रील बना लेंगे। मैं क्यों रील के हिसाब से गाने बनाऊं? मुझे लगता है कि आजकल हम लोग दिमाग से गाने बना रहे हैं दिल से नहीं। दिल से गाना बनाने की बहुत जरूरत है।

फैंस आपके और इमरान की जोड़ी का बेसब्री से इंतजार करते हैं। क्या उनकी विश पूरी होगी?

इमरान मुझे जब भी बोले, मैं उसके साथ काम करूंगा। इमरान सिर्फ मेरा पहला हीरो नहीं बल्कि मेरा बड़ा भाई भी है। मैं अगर आज उसे कह दूं कि एक रोल है तो वो बिना स्क्रिप्ट पढ़ मेरे लिए कर देगा। हमारा रिश्ता ऐसा है। लेकिन मैं ये करना नहीं चाहता। जब किसी का आप पर बहुत यकीन हो तो उसके प्रति जिम्मेदारी बढ़ जाती है। जब तक मेरे पास इमरान के लिए कोई बेहतरीन स्क्रिप्ट नहीं होगी, मैं उससे साथ काम करने के लिए नहीं कह सकता हूं।

मोहित सूरी ने अपने करियर में सबसे अधिक फिल्में इमरान हाशमी को लेकर बनाई हैं।

मोहित सूरी ने अपने करियर में सबसे अधिक फिल्में इमरान हाशमी को लेकर बनाई हैं।

‘सैयारा’ के लिए मिला कोई ऐसा कॉम्प्लीमेंट जो आपके दिल के बहुत करीब हो?

मैंने आदित्य सर की फिल्म देखकर तय किया था कि मुझे डायरेक्टर बनना है। जब आदी सर और रानी मैम ने फिल्म देखी और कहा कि उन्हें फिल्म बहुत ज्यादा पसंद आई, तो मेरे लिए फैन बॉय मोमेंट था। उन दोनों ने कहा कि ये वो फिल्म है, जिसे वो अपनी कंपनी के लिए बनाना चाहते थे और कब से इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इसके जरिए सफलता आएगी या नहीं लेकिन तुमने बहुत अच्छी फिल्म बनाई है। तुम हमारे लिए जीत हुए हो।

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